बुधवार, 11 जुलाई 2018

जल - तरंग


बादलों से नेह का निर्झर बहा
बहककर मचल उठी चंचल हवा !

मोतियों से धरा का आँचल भरा
मन मयूर हो प्रफुल्ल, नाचता !

पर्वतों से फूट पड़ा मधुर नाद
पंछियों के सज गए संगीत साज !

वादियों में गीत बहें कल-कल कर
माटी में बीज जगें, अँगड़ाकर !

विचित्र सा, कौन चित्रकार यह ?
बदल रहा, रंग छटाएँ रह - रह !

और  लो, बिखर गया वह हरा रंग
कण-कण में बज उठी, जल - तरंग !

शनिवार, 7 जुलाई 2018

मेघ - मल्हार


बरस बाद आए बदरा
धरती के द्वार !
मन मगन मदमस्त गाए,
मेघ मल्हार ।।

झुक-झुककर तरुओं ने
किया अभिवादन !
नाजुक लताओं के,
तन-मन में सिहरन !
शीतल पवन ने खोले
खुशियों के द्वार ।
मन मगन मदमस्त गाए,
मेघ मल्हार ।।

छप्पर पर बजती है
बूँदों की झाँझर,
फूलों पर, पत्तों पर
मोती की झालर !
प्रेमगीत गुनगुनाए
बरखा बहार ।
मन मगन मदमस्त गाए,
मेघ मल्हार ।।

कण-कण से फूट रहे,
आनंद अंकुर,
झरनों ने छेड़ दिए
मधुर राग - सुर !
प्यासी पृथ्वी भीगे
अमृत बौछार ।
मन मगन मदमस्त गाए,
मेघ मल्हार ।।

बुधवार, 4 जुलाई 2018

मेरा प्रथम कविता संकलन - 'अब ना रुकूँगी'

मेरी पहली पुस्तक 'अब ना रुकूँगी' बहुत शीघ्र  प्रकाशित होने जा रही है। जिसका मुखपृष्ठ आपके अवलोकन हेतु प्रस्तुत है। यह मेरी 55 कविताओं का संकलन है। मेरे ब्लॉग के सभी पाठकों के प्रोत्साहन एवं सहयोग की सदैव आभारी रहूँगी, जिसके कारण मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मैं पुस्तक प्रकाशन की हिम्मत जुटा पाई। विश्वास है कि आगे भी आप सभी के आशीष एवं शुभेच्छाएँ मेरा मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे।