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शुक्रवार, 7 जुलाई 2023

मेघ मुबारक !


(चित्र मेरी मोबाइल गैलरी से, 
मेरे प्रकृतिप्रेमी बेटे अतुल का है)

धरती को सुंदर श्यामल-से मेघ मुबारक !

और किसानों को हरियाले खेत मुबारक !


अल्हड़ बचपन को कागज की नाव मुबारक !

और जवानी को बारिश का चाव मुबारक !


आसमान को इंद्रधनुष के रंग मुबारक !

झरनों को झर-झर झरने का ढंग मुबारक !


वृक्ष-लताओं को पानी का खेल मुबारक !

बहती नदिया को सागर से मेल मुबारक !


माटी को फिर नए सृजन का गीत मुबारक !

सूनी अँखियों को सपनों का मीत मुबारक !

बुधवार, 11 जुलाई 2018

जल - तरंग


बादलों से नेह का निर्झर बहा
बहककर मचल उठी चंचल हवा !

मोतियों से धरा का आँचल भरा
मन मयूर हो प्रफुल्ल, नाचता !

पर्वतों से फूट पड़ा मधुर नाद
पंछियों के सज गए संगीत साज !

वादियों में गीत बहें कल-कल कर
माटी में बीज जगें, अँगड़ाकर !

विचित्र सा, कौन चित्रकार यह ?
बदल रहा, रंग छटाएँ रह - रह !

और  लो, बिखर गया वह हरा रंग
कण-कण में बज उठी, जल - तरंग !