शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

कितने भरम मिटा गया...

हैं खुशनसीब वो जिन्हें 
सौगात में मिला !
हमको तो तेरा प्यार 
बस खैरात में मिला !

अक्सर मिला किया मुझे 
तू हमकदम बन कर !
पर जब मिला, बहके हुए 
जज्बात में मिला !

मिलकर भी तू कहाँ मिला, 
पूरा किसी जनम !
जब भी मिला, बिखरे हुए 
हालात में मिला! 

कुछ लोग तुम्हें छीन 
ले गए, बड़े हक से !
हमसे तो बस तू ख्वाब 
ओ खयालात में मिला !

जब भी मेरे अपनों ने 
सजाई कोई महफिल,
मेरी कमी का जिक्र 
बात - बात में मिला !

कितने भरम मिटा गया 
बादल का बरसना ,
कच्चे घरों का दरकना 
बरसात में मिला !

1 टिप्पणी:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शनिवार 24 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

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