हैं खुशनसीब वो जिन्हें
सौगात में मिला !
हमको तो तेरा प्यार
बस खैरात में मिला !
अक्सर मिला किया मुझे
तू हमकदम बन कर !
पर जब मिला, बहके हुए
जज्बात में मिला !
मिलकर भी तू कहाँ मिला,
पूरा किसी जनम !
जब भी मिला, बिखरे हुए
हालात में मिला!
कुछ लोग तुम्हें छीन
ले गए, बड़े हक से !
हमसे तो बस तू ख्वाब
ओ खयालात में मिला !
जब भी मेरे अपनों ने
सजाई कोई महफिल,
मेरी कमी का जिक्र
बात - बात में मिला !
कितने भरम मिटा गया
बादल का बरसना ,
कच्चे घरों का दरकना
बरसात में मिला !
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शनिवार 24 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है....
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