रविवार, 30 जुलाई 2023

शिकायत

इसे मान लो चाहे बगावत हमारी
कि तुमसे ही करनी है शिकायत तुम्हारी।

मुहब्बत अगर तुमसे निभाई है हमने
तो नाराजगी भी है अमानत तुम्हारी ।

कभी ना कहा  'प्यार करते हैं तुमसे '
हमेशा ही की है खिलाफत हमारी ।

ये अहसान मानो, छिपा करके दिल में
करी है हमीं ने हिफाजत तुम्हारी ।

मेरी नाखुशी पर क्यूँ तुम मुस्कुराए
अभी भी ना बदली है आदत तुम्हारी ।

हँसाकर रुलाना, सताकर मनाना,
कोई क्यूँ सहे हर शरारत तुम्हारी ?

नहीं अब भरोसा, है हर बात नकली
मिलावट, मिलावट, मिलावट है सारी ।


शुक्रवार, 7 जुलाई 2023

मेघ मुबारक !


(चित्र मेरी मोबाइल गैलरी से, 
मेरे प्रकृतिप्रेमी बेटे अतुल का है)

धरती को सुंदर श्यामल-से मेघ मुबारक !

और किसानों को हरियाले खेत मुबारक !


अल्हड़ बचपन को कागज की नाव मुबारक !

और जवानी को बारिश का चाव मुबारक !


आसमान को इंद्रधनुष के रंग मुबारक !

झरनों को झर-झर झरने का ढंग मुबारक !


वृक्ष-लताओं को पानी का खेल मुबारक !

बहती नदिया को सागर से मेल मुबारक !


माटी को फिर नए सृजन का गीत मुबारक !

सूनी अँखियों को सपनों का मीत मुबारक !