बोलो कभी बबूल वृक्ष पर
भला आम्रफल फलता है ?
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !
कहते हैं कि पूर्वलिखित है,
किसके बंधन कहाँ बँधेंगे ?
किस रस्ते से मिले हमसफर,
किस दोराहे पर बिछड़ेंगे !
पूर्वलिखित ही अगर सभी कुछ,
फिर किसका वश चलता है !
जो जिसके लायक होता है,
वो ही उसको मिलता है !
आत्मा के अनुबंध तिरस्कृत
देह , देह को मोह रही है
फिर भी कहीं कृष्ण की मीरा
मोहन का पथ जोह रही है !
क्षणिक मिलन के सुख से केवल
चंचल हृदय बहलता है !
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !
अपने मन को गंगाजल सा
पावन कहने वालो सुन लो
प्रेम - प्यार में, रण में सब कुछ,
जायज़ कहने वालो सुन लो
यौवन पर इतराना कैसा
इक दिन सबका ढलता है ,
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !