जितना ज्यादा मन रोएगा
उतना ओंठ हँसेगे जी
तुम अपने जीवन को जी लो
हम अपना जी लेंगे जी !
बच्चों जैसा पाया हमने
कुछ बूढ़ों का चाल चलन
दिखा खिलौना अधिक रंगीला
अब हम वो ही लेंगे जी !
दिखा रहे हैं जो हमदर्दी
वो हैं दर्द के सौदागर
तड़पोगे तुम , ये तो अपना
सौदा बेच चलेंगे जी !
उफनी नदिया, तो घर उजड़े
पर मानव की जिद देखो,
जब उतरेगी बाढ़, वहीं पर
फिर से लोग बसेंगे जी !
इक थैली के चट्टे बट्टे
छिपे हुए रुस्तम हैं सब
आरोपों प्रत्यारोपों के,
जमकर तीर चलेंगे जी !