रविवार, 15 जुलाई 2018

मीरा बावरी !

सुन कान्हा की मधुर मुरलिया,
खो गई मीरा बावरी !
उस छलिया के प्रेम में पड़कर,
हो गई मीरा बावरी !

नटवर नागर के दर्शन की
लगन लगी जब नैनों को,
गोविंद को पाने की धुन में
जागी मीरा रैनों को !
'सूली ऊपर सेज पिया की'
कह गई मीरा बावरी !

विषधर बन गया हार पुष्प का,
विष भी हो गया मधुर सुधा !
हाथ तंबोरा, पाँव में घुँघरू
मीरा हो गई कृष्ण-कथा !
साज-सिंगार त्यागकर जोगन
बन गई मीरा बावरी !

मीरा श्याम, श्याम ही मीरा
अलग-अलग दुनिया जाने !
प्रीत तो अपनी रीत चलाए
जग की रीत कहाँ माने !
भक्ति-सिंधु में, प्रेम-सरित का
संगम है मीरा बावरी !

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