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शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

पतवार तुम्हारे हाथों है

पतवार तुम्हारे हाथों है,
मँझधार का डर क्यों हो मुझको ?
इस पार से नैया चल ही पड़ी,
उस पार का डर क्यों हो मुझको ?

जीवन की अँधेरी राहों पर
चंदा भी तुम, तारे भी तुम ।
सूरज भी तुम, दीपक भी तुम,
अँधियार का डर क्यों हो मुझको ?

मैं पतित, मलीन, दुराचारी,
तुम मेरे गंगाजल कान्हा !
घनश्याम सखा तुम हो मेरे,
संसार का डर क्यों हो मुझको ?

जग तेरी माया का नाटक
तूने ही पात्र रचा मेरा,
जिस तरह नचाए, नाचूँ मैं
बेकार का डर क्यों हो मुझको ?

मैं कर्तापन में भरमाया
तू मुझे देखकर मुस्काया,
जब सारा खेल ही तेरा है
तो हार का डर क्यों हो मुझको ?

संसार का प्रेम है इक सपना,
है कौन यहाँ मेरा अपना !
तू प्रेम करे तो दुनिया के
व्यवहार का डर क्यों हो मुझको ?


गुरुवार, 7 मार्च 2019

प्रार्थना

मेरे जीवन का पल-पल
प्रभु तेरा पूजन हो जाए,
श्वास-श्वास में मधुर नाम
भौंरे-सा गुंजन हो जाए।

जब भी नयन खुलें तो देखूँ
तेरी मोहिनी मूरत को,
मेरा मन हो अमराई
तू कोकिल-कूजन हो जाए।

जग में मिले भुजंग अनगिनत
उनके दंशो की क्या गिनती?
वह दुःख भी अच्छा है जिसमें
तेरा सिमरन हो जाए ।

हृदय धरा पर बरसो प्रभुवर
श्यामल मेघों-से रिमझिम,
कृपा दृष्टि की धारा बरसे
जीवन सावन हो जाए।

इतना छ्ल पाया पग-पग
दुनिया का प्रेम भयावह है,
अब तुमसे नाता ना टूटे
ऐसा बंधन हो जाए ।