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बुधवार, 12 अगस्त 2020

कितना समय लगाया कान्हा !!!

दुनिया ने जब जब दुत्कारा
तूने गले लगाया कान्हा,
मैं अर्जुन सी भ्रमित हो गई
गीता ज्ञान सिखाया कान्हा !!!

सपनों की सच्चाई देखी,
अच्छों की अच्छाई देखी,
अपनेपन में छिपी, कुटिलता-
स्वारथ की परछाईं देखी,
कदम-कदम ठोकर खाकर भी
पागल मन भरमाया कान्हा !!!

सुख की खोज में दर-दर भटका,
द्वार खुला नहीं, फिर भी घट का !
फूलों की चाहत थी किंतु
माया ने काँटों में पटका !
जब बेड़ा भवसागर अटका
तूने पार लगाया कान्हा !!!

बारह महीने सावन-भादों
मेरी आँखों में रहते हैं,
तुम आओ तो चरण पखारूँ
नयनों से झरने बहते हैं !
टूट ना जाए साँस की डोरी
कितना समय लगाया कान्हा !!!

गुरुवार, 7 मार्च 2019

प्रार्थना

मेरे जीवन का पल-पल
प्रभु तेरा पूजन हो जाए,
श्वास-श्वास में मधुर नाम
भौंरे-सा गुंजन हो जाए।

जब भी नयन खुलें तो देखूँ
तेरी मोहिनी मूरत को,
मेरा मन हो अमराई
तू कोकिल-कूजन हो जाए।

जग में मिले भुजंग अनगिनत
उनके दंशो की क्या गिनती?
वह दुःख भी अच्छा है जिसमें
तेरा सिमरन हो जाए ।

हृदय धरा पर बरसो प्रभुवर
श्यामल मेघों-से रिमझिम,
कृपा दृष्टि की धारा बरसे
जीवन सावन हो जाए।

इतना छ्ल पाया पग-पग
दुनिया का प्रेम भयावह है,
अब तुमसे नाता ना टूटे
ऐसा बंधन हो जाए ।


सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

प्रार्थना


हार से बोझिल पगों को ,
जीत का आह्वान देना !
सोच को मेरी, प्रभु !
सत्प्रेरणा का दान देना ।।

प्रेम देना, स्नेह देना,
किंतु मत अहसान देना !
सत्य की कटु औषधि को,
मधुरता, अनुपान देना ।।

भीत, आशंकित हृदय की,
आस्था को मान देना !
पीड़ितों को, शोषितों को,
करूणा का वरदान देना ।।

आत्मबल को खो चुके जो,
उन्हें आत्माभिमान देना !
काँपती दीपक की लौ को,
भोर तक परित्राण देना ।।

उचित-अनुचित, बुरे-अच्छे,
मार्ग का संज्ञान देना !
खो ना जाऊँ भीड़ में,
मेरी अलग पहचान देना ।।