बोलो कभी बबूल वृक्ष पर
भला आम्रफल फलता है ?
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !
कहते हैं कि पूर्वलिखित है,
किसके बंधन कहाँ बँधेंगे ?
किस रस्ते से मिले हमसफर,
किस दोराहे पर बिछड़ेंगे !
पूर्वलिखित ही अगर सभी कुछ,
फिर किसका वश चलता है !
जो जिसके लायक होता है,
वो ही उसको मिलता है !
आत्मा के अनुबंध तिरस्कृत
देह , देह को मोह रही है
फिर भी कहीं कृष्ण की मीरा
मोहन का पथ जोह रही है !
क्षणिक मिलन के सुख से केवल
चंचल हृदय बहलता है !
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !
अपने मन को गंगाजल सा
पावन कहने वालो सुन लो
प्रेम - प्यार में, रण में सब कुछ,
जायज़ कहने वालो सुन लो
यौवन पर इतराना कैसा
इक दिन सबका ढलता है ,
जो जिसके लायक होता है
वो ही उसको मिलता है !
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 28 सितंबर, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंथोड़ा सा पूर्व लिखित भी है और बहुत कुछ हमारे हाथ में भी है, सुंदर सृजन!!
जवाब देंहटाएंअति संदर। भाग्य के लीक को स्वीकारती रचना
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर पंक्तियाँ, और उत्तम निष्कर्ष। जो जिसके लायक होता है, वही उसको मिलता है!
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