मंगलवार, 7 जनवरी 2020

द्वीप


अतलस्पर्शी गहन मौन का
एक महासागर फैला है
तुमसे मुझ तक,मुझसे तुम तक !
दो वीराने द्वीपों-से हम,
अपनी - अपनी सीमाओं में
सिमटे, ठहरे, बद्ध पड़े हैं !

ज्वार और भाटा आने से
इन सुदूर द्वीपों पर भी कुछ
हलचल-सी मच ही जाती है !
शंख, सीपियाँ, सच्चे मोती
कभी भेजना, कभी मँगाना
अनायास हो ही जाता है !

मैं इस तट कुछ लिख देती हूँ
नीलम-से जल की स्याही से
तुम उस तट पर कुछ लिख देना !
लहरों के संग बह आएँगी
लिखी पातियाँ इक दूजे तक
चंदा से कह देना, पढ़ दे !

कितना है आश्चर्य, नियति का
सीमाएँ गढ़ दीं असीम की,
सागर के भी तट होते हैं !
मन भी एक महासागर है
फिर लौटी हैं भाव तरंगें
कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों को छू !

आते-जाते तूफानों में
जाने कितनी दूर रह गईं
मेरे गीतों की नौकाएँ !
खामोशी का गहन समंदर,
दो द्वीपों पर मचे शोर का
कब तक साक्षी बना रहेगा ?







10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 08 जनवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत शुक्रिया आदरणीया यशोदा दी।

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  3. प्रिय मीना बहन , अत्यंत सुंदर बौद्धिक रचना | दो असमान व्यक्तित्व साथ रहकर द्वीप से हो , जहाँ जीवन में वेदना के कारक होते हैं वहीँ उनसे जन्मी पीड़ा सृजन की कारक बन जाती है | रचना के मर्मस्पर्शी भाव मन को भाव विहल कर जाते हैं जहाँ नियति को स्वीकारने की विवशता है तो भावों का महासागर सा विस्तार भी है | एक और अनमोल सृजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं आपको |

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  4. मैं इस तट कुछ लिख देती हूँ
    नीलम-से जल की स्याही से
    ..."

    बहुत बढ़िया। अप्रतिम। भाव से परिपूर्ण रचना।

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  5. मन भी एक महासागर है
    फिर लौटी हैं भाव तरंगें
    कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों को छू !
    आपकी रचनाओं की गहराई में डूब कर तैरने का मन करता है। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया मीना जी।

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  6. दिल को छूती बहुत ही सुंदर रचना, मीना दी।

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  7. मन की अकुलाहट कहिए या वैचारिक द्वंद --- बाहर आने की असफल चेष्टा करते प्रतीत हो रहे हैं.
    बधाई.

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  8. कितना है आश्चर्य, नियति का
    सीमाएँ गढ़ दीं असीम की,
    सागर के भी तट होते हैं !
    चिन्तन का चरमोत्कर्ष...गहन भावों से सजी अत्यन्त सुन्दर
    रचना ।

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  9. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार(२४-०२-२०२०) को 'स्वाभिमान को गिरवी रखता'(चर्चा अंक-३६२१) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  10. मैं इस तट कुछ लिख देती हूँ
    नीलम-से जल की स्याही से
    तुम उस तट पर कुछ लिख देना !
    लहरों के संग बह आएँगी
    लिखी पातियाँ इक दूजे तक
    चंदा से कह देना, पढ़ दे ! बेहद खूबसूरत रचना 👌👌

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