बुधवार, 7 मार्च 2018

औरत


समय की धारा से,लड़कर

पार होना आ गया,
अपनी नौका की स्वयं
पतवार औरत !!!

काव्य में वह करूणरस,

है राग में वह भैरवी,
साज़ में मुरली मधुर
सितार औरत !!!

रेशमी धागों सी नाजुक

पुष्प सी कोमल सही,
गर उठी कुदृष्टि तो,
अंगार औरत !!!

चूड़ियों वाली कलाई

इतनी भी कमसिन नहीं,
वक्त आए, थाम ले
तलवार औरत !!!

द्रौपदी, सीता, अहिल्या

जब बनी, तब क्या मिला ?
आज दुर्गा, शक्ति का
अवतार औरत !!!

तिलमिलाता क्यों, ना जाने

शक्ति का पूजक समाज,
माँगती है अपने जब,
अधिकार औरत !!!

शुक्रवार, 2 मार्च 2018

तुम्हारी याद में....

धरा के अंक में समाता
सिंदूरी सूरज,
नीड़ों को लौटती,
सफेद फूलमालाओं सी
शुभ्र बगुलों की पंक्तियाँ !

पीपल के पात-पात से
गूँजता पक्षियों का कलरव,
पेड़ों की डालियों को
हौले-हौले झकझोरकर
ना जाने कौन से राज पूछती
शरारती हवा !

दूर कहीं गूँजती - सी
मृदंग की मधुर थाप,
और तुम्हारे इंतजार में
भटकता उदास मन !
शाम और उदासी
अब पर्याय हो गए हैं
एक दूजे के !

यादों की बदलियाँ
घिर आती हैं !
मैं पलकें बंद कर लेती हूँ
शाम अब भीग रही है !!!

गुरुवार, 1 मार्च 2018

शबरी

चुन-चुनकर फल लाए शबरी
पुष्प के हार बनाए शबरी
निशिदिन ध्यान लगाए शबरी
फिर भी रहे उदास !
राम रमैया कब आओगे,
छूट ना जाए साँस !!!

शीतल जल गगरी भर लाऊँ
कुटिया को फूलों से सजाऊँ
प्रभु पंथ पर नयन बिछाऊँ
कंद मूल नैवेद्य बनाऊँ,
कैसे स्वागत करूँ प्रभु का
मैं चरणों की दास !!!
राम रमैया कब आओगे,
छूट ना जाए साँस !!!

भक्त की पीर प्रभु पहचाने
मेरे दुःख से क्यूँ अंजाने ?
एक एक दिन युग सम लागे
कैसे राम मिलेंगे जाने !
किंतु मिलेंगे इसी जन्म में
इतना है विश्वास !!!
राम रमैया कब आओगे,
छूट ना जाए साँस !!!

खिंचे चले आए जब रघुवर
शबरी की भक्ति से बँधकर
मीठे बेर खिलाए चखकर
हरि खाते हैं हँस-हँसकर !
भर-भर आई अँखियाँ, मिट गई
जन्म-जन्म की प्यास !!!
    ----मीना शर्मा----