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सोमवार, 10 मार्च 2025

जहरी मीडिया

आग लगने की तके है 
राह जहरी मीडिया
घी लिए तैयार बैठा, 
वाह जहरी मीडिया !

धर्म, जाति, कौम के 
रंग में रंगे हर रूह को
विषबुझे तीरों से करता
वार जहरी मीडिया !

चैनलों के कटघरे में 
हैं खड़े राम औ रहीम
कभी वकील है, कभी 
गवाह जहरी मीडिया !

हल निकल सकता जहाँ 
खामोशियों से खुद-ब-खुद
चीखता है बेवजह, 
बेपनाह जहरी मीडिया !

बस दूध के उबाल सा 
उफने है चंद रोज,
पकड़े है फिर अगली खबर 
की राह जहरी मीडिया !

जनता छली जाती रही , 
सच की तलाश में
देता रहा बस मुफ्त की 
सलाह जहरी मीडिया !