बुधवार, 7 जनवरी 2026

जानकर कौन भला, मोल इसे लेता है

जब भी मैंने कभी, दिल उसका दुखाया होगा
चोट का इक निशां, मेरी रूह पे आया होगा !

जानकर कौन भला, मोल इसे लेता है 
ये मुहब्बत का मर्ज़ खुद चला आया होगा !

मेरे दिल पर लगे, ज़ख्मों को अगर गिन पाओ
करो हिसाब  कि, कितनों ने दुखाया होगा !

अपनी आँखों के आँसुओं को, छिपाने खातिर
एक लतीफ़ा तेरी, महफ़िल में सुनाया होगा  !

मैंने इक हाथ से ये गीत लिखे उसके लिए
पर दुआ में तो, दोनों को उठाया होगा !

ख़ुदा गवाह, इबादत के कुछ लम्हों के सिवा,
एक पल के लिए , तुझको ना भुलाया होगा !

किसी जनम का कहीं होगा बकाया कुछ तो,
बेसबब तो नहीं कुदरत ने मिलाया होगा !






















कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें