शनिवार, 3 जनवरी 2026

बिगड़े जो कभी बात तो...

व्यवहार बदल देते हैं औकात देखकर
मुंह फेर लेते, लोग हैं हालात देखकर !

रिश्तों की इस बाजार में , लगती हैं बोलियाँ
करते हैं लेन - देन, मोल - भाव देखकर !

मानक है यहाँ प्रेम का, बस देह का मिलन
तुम क्या करोगे , नयनों की बरसात देखकर !

वो भी चला गया है थाम हाथ किसी का
हँसते हैं लोग अब मेरे जज़बात देखकर !

वो छोड़कर चले, जो कभी हमकदम रहे
मेरी तबीयत को जरा, नासाज देखकर !

बिगड़े जो कभी बात तो आवाज लगाना
हम वो नहीं जो साथ दें खुशहाल देखकर !








2 टिप्‍पणियां:

  1. बिगड़े जो कभी बात तो आवाज लगाना
    हम वो नहीं जो साथ दें खुशहाल देखकर !
    वाह !!
    अद्भुत सृजन ।

    जवाब देंहटाएं