ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं
हम इनके गीतों को सुनते,
सपने बुनते रह जाते हैं !
इस उपवन में पलते बढ़ते,
उड़ते हैं ऊँचे नील गगन,
ये डाली - डाली,फुदक - फुदक,
फिरते हैं होकर मस्त मगन !
ये पंछी हैं मेहमानों - से,
पहले लगते अनजानों से,
पर संग इनके रहते - रहते,
हम खुद इनसे जुड़ जाते हैं !
ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं ?
पंखों को ताकत से भरकर,
अपना दाना पानी चुगकर,
छूने को नभ की ऊँचाई,
निकलेंगे ये घर से बाहर !
जीवन की ये है सच्चाई,
रस्ता ना कोई पूरा सीधा,
बदलेंगी सबकी ही राहें,
सारे रस्ते मुड़ जाते हैं !
ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं ?
आज मेरी कक्षा ( दसवीं ) के बच्चों को शालेय जीवन से विदा देते हुए मन में कुछ भाव उमड़ आए, जो इस गीत के रूप में अभिव्यक्त हुए ......

सुंदर
जवाब देंहटाएंआभार आदरणीय सुशील सर
हटाएंबहुत बहुत शुक्रिया पम्मी जी
जवाब देंहटाएंबहुत खूबसूरत सृजन मीना जी । जब ये ही पंछी आसमान की ऊँचाइयों को छूते हैं तो सीना गर्व से चौडा हो जाता है ।
जवाब देंहटाएंसही कहा शुभा जी, सादर आभार
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