मंगलवार, 6 जनवरी 2026

ये पंछी कहाँ से आते हैं ?

बच्चों द्वारा दिया गया सरप्राइज








          
ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं
हम इनके गीतों को सुनते,
सपने बुनते रह जाते हैं !

इस उपवन में पलते बढ़ते,
उड़ते हैं ऊँचे नील गगन,
ये डाली - डाली,फुदक - फुदक,
फिरते हैं होकर मस्त मगन !
ये पंछी हैं मेहमानों - से,
पहले लगते अनजानों से,
पर संग इनके रहते - रहते,
हम खुद इनसे जुड़ जाते हैं !

ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं ?

पंखों को ताकत से भरकर,
अपना दाना पानी चुगकर,
छूने को नभ की ऊँचाई,
निकलेंगे ये घर से बाहर !
जीवन की ये है सच्चाई,
रस्ता ना कोई पूरा सीधा,
बदलेंगी सबकी ही राहें,
सारे रस्ते मुड़ जाते हैं  !

ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं ?
     
आज मेरी कक्षा ( दसवीं ) के बच्चों को शालेय जीवन से विदा देते हुए मन में कुछ भाव उमड़ आए, जो इस गीत के रूप में अभिव्यक्त हुए ......





2 टिप्‍पणियां:


  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 7 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं