व्यवहार बदल देते हैं औकात देखकर
मुंह फेर लेते, लोग हैं हालात देखकर !
मुंह फेर लेते, लोग हैं हालात देखकर !
रिश्तों की इस बाजार में , लगती हैं बोलियाँ
करते हैं लेन - देन, मोल - भाव देखकर !
मानक है यहाँ प्रेम का, बस देह का मिलन
तुम क्या करोगे , नयनों की बरसात देखकर !
वो भी चला गया है थाम हाथ किसी का
हँसते हैं लोग अब मेरे जज़बात देखकर !
मेरी तबीयत को जरा, नासाज देखकर !
बिगड़े जो कभी बात तो आवाज लगाना
हम वो नहीं जो साथ दें खुशहाल देखकर !