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शनिवार, 31 दिसंबर 2022

साल नहीं बीतता है....

श्वास - श्वास, दिवस - मास रीतते हैं हम,

हाँ, रीतते हैं हम !

साल नहीं बीतता है, बीतते हैं हम !


बरखा में बूँद - बूँद कर, टपक रही है उम्र,

चुभती हवा में शिशिर की, सिहर रही है उम्र ।

फिर बसंत आगम पर रीझते हैं हम,

साल नहीं बीतता है, बीतते हैं हम !


जीना तो कहीं खो गया पाने की होड़ में,

जीवन था एक, बीत गया जोड़-तोड़ मे ।

अब भी कहाँ खुशियों का गणित सीखते हैं हम,

साल नहीं बीतता है, बीतते हैं हम !


कसमों से भरी टोकरी, वादों का पिटारा,

है अनुभवों की पोटली , यादों का पसारा ।

चंदन की तरह जग के लिए झीजते हैं हम !

साल नहीं बीतता है, बीतते हैं हम !


गिनते हैं लोग, उम्र के कितने बरस जिए,

गिनते नहीं, उधड़े हुए कितने जखम सिए ।

प्रेम की बरसात में, क्या भीगते हैं हम ?

साल नहीं बीतता है, बीतते हैं हम !





मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

दो बालगीत

1- जानवरों का नववर्ष
जंगल के पशुओं ने सोचा
हम भी धूम मचाएँ ,
मानव के जैसे ही कुछ
हम भी नववर्ष मनाएँ !

वानर टोली के जिम्मे है
फल-फूलों का इंतज़ाम,
मीठे-मीठे मधु के छत्ते
ले आएँगे भालूराम !

हिरन और खरगोश पकाएँ
साग और तरकारी,
सारे पक्षी मिलजुल कर लें
दावत की तैयारी !

नृत्य कार्यक्रमों का
निर्देशन करवाएँगे मोर,
गायन के संचालन में
कोकिलजी मग्न विभोर !

शेरसिंह और हाथीजी तो
होंगे अतिथि विशेष,
आमंत्रित सारे पशु-पक्षी
कोई रहे ना शेष !

कोई पशु किसी को,
उस दिन ना मारे,ना खाए !
एक दिवस के खातिर सब
शाकाहारी बन जाएँ !

जश्न मनाएँ नए वर्ष का,
मौज करें, नाचे गाएँ !
इंसानों को  नए साल की
भेजें शुभ - कामनाएँ !!!
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2- ध्वनि - गीत
टपटप टिपटिप बूँदें गिरतीं,
रिमझिम वर्षा आती !
झरझर झरझर बहता झरना,
कलकल नदिया गाती !

टणटण करता घंटा बाजे,

घुँघरू करते रुनझुन !
किर्र किर्र झिंगुर करता है,
भौंरे करते गुनगुन !

काँव-काँव कौआ चिल्लाए,
कोयल कुहू-कुहू गाती !
चूँ-चूँ-चूँ-चूँ करती चिड़िया,
दिन भर शोर मचाती !

खड़-खड़ करते सूखे पत्ते,
इधर-उधर उड़ जाते !
सर-सर करती चले हवा तो,
पौधे कुछ झुक जाते !

छुमछुम पायल को छ्नकाती,
गुड़िया मेरी आती !
मिट्ठू - मिट्ठू तोते जैसी,
तुतलाकर बतियाती !!!