शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

रिश्ते

जितना बूझूँ, उतना उलझें

एक पहेली जैसे रिश्ते।

स्नेह दृष्टि की उष्मा पाकर,

पिघल - पिघलकर रिसते रिश्ते।


कभी लहू - से सुर्ख रंग के,

कभी हरे हैं हरी दूब - से ।

कभी प्रेम रंग रंगे गुलाबी ,

पल - पल रंग बदलते रिश्ते।


माटी में मिल वृक्ष उगाते

अँखुआए बीजों - से रिश्ते ।

खुशबू बनकर महक रहे हैं,

चंदन जैसा घिसते रिश्ते।


बूँदें बनकर सिमट गए हैं,

नयनों की गीली कोरों में ,

दो मुट्ठी अपनापन पीकर

सारी उम्र बरसते रिश्ते ।


पतझड़ के पत्तों सम झरते,

नवपल्लव से तरु भरने को ।

अपने प्रिय के हित की खातिर

स्वयं मृत्यु को वरते रिश्ते ।












रविवार, 13 नवंबर 2022

पनघट

यादों के सब पन्ने उड़कर

बिखरे जीवन सरिता तट पर,

सारी सखियाँ लौट गईं,

मैं एकाकी सूने पनघट पर !


इस पनघट पर मेल हुआ था,

हँसी - खुशी का खेल हुआ था।

साँझ हुई, पनघट के साथी

अपनी - अपनी राह चल दिए।

मैं पनघट को छोड़ ना पाऊँ,

अपना नाता तोड़ ना पाऊँ।

मेरे टूटे हृदय - कलश के

टुकड़े छिटके हैं पनघट पर !

सारी सखियाँ लौट गईं,

मैं एकाकी सूने पनघट पर !


पदचिन्हों पर किए समर्पित,

पारिजात के पुष्प निशा में।

भोर हुई, पदचिन्ह मिट गए,

खोजूँ भी तो, कौन दिशा में ?

पनघट तो फिर से चहकेगा,

फिर कोई राही बहकेगा,

किंतु मेरे नयनों की गागर

रिक्त रह गई इस पनघट पर।

सारी सखियाँ लौट गईं,

मैं एकाकी सूने पनघट पर !



रविवार, 17 जुलाई 2022

हिंदी भाषा: सुझाव और विमर्श

 


मुझे यह बताते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है कि आदरणीय माडभूषि रंगराज अयंगर जी की सातवीं पुस्तक "हिंदी भाषा : सुझाव और विमर्श" का प्रकाशन कार्य संपूर्ण हो चुका है और यह पाठकों के लिए अमेजन तथा बुक रिवर पर उपलब्ध है। 

पुस्तक यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। 

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इसके अलावा आप Rangraj Iyengar जी से  

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यह पुस्तक पूरी तरह से हिन्दी भाषा को समर्पित है। विशेषकर बच्चों को हिंदी भाषा की अच्छी शिक्षा देना और उसके लिए शिक्षक शिक्षिकाओं को विभिन्न विधाओं से समृद्ध करना ही इस पुस्तक का प्रमुख ध्येय है। हिंदी क्यों सीखें, कैसे सिखाएँ,उच्चारण पर ध्यानाकर्षण, बोलना - पढ़ना - लिखना जैसे मुख्य विषयों पर विशेष जोर दिया गया है।राष्ट्र भाषा - राजभाषा में अंतर स्पष्ट किया गया है ।हिंदी वर्णों के सही उच्चारण के लिए उदाहरण सहित विशेष तकनीक का उल्लेख किया गया है जिससे छोटी उम्र और कक्षाओं में बच्चों को सही उच्चारण सिखाया जा सके।

हिंदी की एक पूरी लेख मंजूषा पाठकों को एक जगह उपलब्ध कराई गई है।

देश में हिंदी की दशा का उल्लेख करते हुए उसे सुधारने के तरीकों पर भी चर्चा और सुझाव इस पुस्तक में उपलब्ध हैं । व्यवहारिक हिंदी के गुण दोषों की भी चर्चा है। परभाषा शब्द और गुणों को अपनाने की अनुशंसा की गई है।

भारत के विभिन्न राज्यों व क्षेत्रों में हिंदी के उच्चारण पर एक लेख में संदर्भ सहित विशेष चर्चा की गई है और सुझाव है कि हालातों को समझते हुए हम लोगों को सही उच्चारण की तरफ प्रेरित करें ,न कि उन पर हँसें।

संक्षिप्त में कहा जा सकता है कि पुस्तक हिंदी के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक अत्यंत ही उपयोगी दस्तावेज है।