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मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

एक कहानी अनजानी !

आँखों में बसा लो स्वप्न मेरा
होठों में दबा लो गीत मेरे !
बंजारे मन का ठौर कहाँ,
ढूँढ़ोगे तुम मनमीत मेरे !
बस एक कहानी अनजानी
सीने में छुपाकर जी लेना !!!

फूलों की खुशबू बिखरेगी,
तो बाग भी सारा महकेगा ।
धीमे से आना द्वार मेरे,
आहट से ये मन बहकेगा !
तुम मेरी कहानी अनजानी
सीने में छुपाकर जी लेना !!!

तारों में बीच में मत खोजो,
चंदा के गुमसुम मुखड़े को,
रूठे रहने दो आज मुझे,
मत खत्म करो इस झगड़े को !
फिर एक कहानी अनजानी
सीने में छुपाकर जी लेना !!!

नदिया के किनारे सूने क्यों,
क्यों सागरतट है वीराना ?
तुम जिद ना करो यूँ सुनने की,
जिद्दी लहरों का अफसाना !
अनकही, कहानी अनजानी
सीने में छुपाकर जी लेना !!!

मत क्षुद्र पतंगे - सा जलना,
नदिया-सागर सम मत मिलना !
धरती-नभ जैसे मिलकर हम,
रच लेंगे एक क्षितिज अपना !
हाँ, यही कहानी अनजानी
सीने में छुपाकर जी लेना !!!

एक कहानी अनजानी
सीने में छुपाकर जी लेना !!!