बुधवार, 7 जनवरी 2026

जानकर कौन भला, मोल इसे लेता है

जब भी मैंने कभी, दिल उसका दुखाया होगा
चोट का इक निशां, मेरी रूह पे आया होगा !

जानकर कौन भला, मोल इसे लेता है 
ये मुहब्बत का मर्ज़ खुद चला आया होगा !

मेरे दिल पर लगे, ज़ख्मों को अगर गिन पाओ
करो हिसाब  कि, कितनों ने दुखाया होगा !

अपनी आँखों के आँसुओं को, छिपाने खातिर
एक लतीफ़ा तेरी, महफ़िल में सुनाया होगा  !

मैंने इक हाथ से ये गीत लिखे उसके लिए
पर दुआ में तो, दोनों को उठाया होगा !

ख़ुदा गवाह, इबादत के कुछ लम्हों के सिवा,
एक पल के लिए , तुझको ना भुलाया होगा !

किसी जनम का कहीं, होगा बकाया कुछ तो,
बेसबब तो नहीं, कुदरत ने मिलाया होगा !






















मंगलवार, 6 जनवरी 2026

ये पंछी कहाँ से आते हैं ?

बच्चों द्वारा दिया गया सरप्राइज








          
ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं
हम इनके गीतों को सुनते,
सपने बुनते रह जाते हैं !

इस उपवन में पलते बढ़ते,
उड़ते हैं ऊँचे नील गगन,
ये डाली - डाली,फुदक - फुदक,
फिरते हैं होकर मस्त मगन !
ये पंछी हैं मेहमानों - से,
पहले लगते अनजानों से,
पर संग इनके रहते - रहते,
हम खुद इनसे जुड़ जाते हैं !

ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं ?

पंखों को ताकत से भरकर,
अपना दाना पानी चुगकर,
छूने को नभ की ऊँचाई,
निकलेंगे ये घर से बाहर !
जीवन की ये है सच्चाई,
रस्ता ना कोई पूरा सीधा,
बदलेंगी सबकी ही राहें,
सारे रस्ते मुड़ जाते हैं  !

ये पंछी कहाँ से आते हैं
और दूर कहाँ उड़ जाते हैं ?
     
आज मेरी कक्षा ( दसवीं ) के बच्चों को शालेय जीवन से विदा देते हुए मन में कुछ भाव उमड़ आए, जो इस गीत के रूप में अभिव्यक्त हुए ......





शनिवार, 3 जनवरी 2026

बिगड़े जो कभी बात तो...

व्यवहार बदल देते हैं औकात देखकर
मुंह फेर लेते, लोग हैं हालात देखकर !

रिश्तों की इस बाजार में , लगती हैं बोलियाँ
करते हैं लेन - देन, मोल - भाव देखकर !

मानक है यहाँ प्रेम का, बस देह का मिलन
तुम क्या करोगे , नयनों की बरसात देखकर !

वो भी चला गया है थाम हाथ किसी का
हँसते हैं लोग अब मेरे जज़बात देखकर !

वो छोड़कर चले, जो कभी हमकदम रहे
मेरी तबीयत को जरा, नासाज देखकर !

बिगड़े जो कभी बात तो आवाज लगाना
हम वो नहीं जो साथ दें खुशहाल देखकर !