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सोमवार, 16 सितंबर 2024
गणपति बाप्पा, मत जाओ ना !
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( गणपति अपने गाँव चले, कैसे हमको चैन पड़े ) ग्यारह दिन ऐसे बीते हैं , जैसे बीते ग्यारह पल ! गणपति बाप्पा मत जाओ ना, कहते होकर भाव विह्वल ! इ...
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शनिवार, 31 दिसंबर 2022
साल नहीं बीतता है....
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श्वास - श्वास, दिवस - मास रीतते हैं हम, हाँ, रीतते हैं हम ! साल नहीं बीतता है, बीतते हैं हम ! बरखा में बूँद - बूँद कर, टपक रही है उम्र, चु...
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गुरुवार, 26 नवंबर 2020
स्वर्ण-से क्षण
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स्वर्ण संध्या, स्वर्ण दिनकर सब दिशाएँ सुनहरी ! बिछ गई सारी धरा पर एक चादर सुनहरी ! आसमाँ पर बादलों में इक सुनहरा गाँव है, स्वर्ण-से क्षण, स्...
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गुरुवार, 18 अप्रैल 2019
गीत उगाए हैं !!!
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मन की बंजर भूमि पर, कुछ बाग लगाए हैं ! मैंने दर्द को बोकर, अपने गीत उगाए हैं !!! रिश्ते-नातों का विष पीकर, नीलकंठ से शब्द हुए ! स्वा...
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मंगलवार, 9 अप्रैल 2019
एक कहानी अनजानी !
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आँखों में बसा लो स्वप्न मेरा होठों में दबा लो गीत मेरे ! बंजारे मन का ठौर कहाँ, ढूँढ़ोगे तुम मनमीत मेरे ! बस एक कहानी अनजानी सीने में छ...
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