चिड़िया

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शनिवार, 27 जुलाई 2019

यथार्थ

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मैंने अपने खून के कुछ  कतरे बोए थे, उनको सींचा था मैंने  अपनी साँसों से अपने ख्वाबों को कूट-काटकर खाद बनाकर डाली मैंने !!! उन कतरों ...
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गुरुवार, 11 जुलाई 2019

सावन

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बोल पथिक ! क्या तेरे देस, सावन अब भी ऐसा होता है ? परदेसी बादल, वसुधा के  नयनों में सपने बोता है ? बाग-बगीचों में अब भी, झूले पड़ते...
29 टिप्‍पणियां:
रविवार, 7 जुलाई 2019

ग़ाफ़िल नहीं हूँ !

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नील नभ की छाँह में ठहरा पथिक हूँ, मैं भटकता दर-ब-दर, बादल नहीं हूँ। एक अंधी दौड़ है, ये दौर अंधा ! मैं किसी भी दौड़ में शामिल नहीं हूँ।...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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