मनमोहन नटखट कान्हा, घनश्याम मनोहर प्यारा !
मुरलीधर कृष्ण कन्हैया, गिरिधारी, नंद दुलारा !
वंशी को बजा बजाकर, गैयों को चरा चराकर,
माखन को चुरा चुराकर, बन गया सारे ब्रज का प्यारा !
गोकुल में माखन खाया, वृंदावन रास रचाया,
द्वारिका में राज्य बसाया, मथुरा में कंस संहारा !
जब विप्र सुदामा आया, मैत्री का मान बढ़ाया,
दो मुट्ठी चावल के बदले में राजकोष दे डारा !
द्रौपदी का चीर बढ़ाया, दुर्योधन मान घटाया,
साड़ी का अंत ना आया, तूने क्या जादू कर डारा !
अर्जुन को मित्र बनाया, गीता का ज्ञान सुनाया,
जब अर्जुन हिम्मत हारा, तू बन गया परम सहारा !
जब किया भरोसा नरसी, तूने पल भर देर नहीं की,
नानीबाई का भाई बनकर, भक्त का काज सँवारा ।
कहते हैं दया का सागर, तू मोहन नटवर नागर
दर्शन के प्यासे नैना, ज्यों चंद्र चकोर निहारा !
तूने मुझसे ऐसा नाता जोड़ा है
तेरी खातिर हर नाते को तोड़ा है ।
जितना प्यार करूँ तुमसे मैं, थोड़ा है
तूने मुझसे ऐसा नाता जोड़ा है।।
तेरी खातिर हर नाते को तोड़ा है ।
जितना प्यार करूँ तुमसे मैं, थोड़ा है
तूने मुझसे ऐसा नाता जोड़ा है।।
झारी भरकर लाई हूँ गंगाजल से
स्नान करो मैं तुम्हें पोंछ दूँ आँचल से
जितना लाड लडाऊँ तुमको, थोड़ा है।।
तेरी बगिया की मैं मालिन बन जाऊँ
तेरी खातिर फूल सुनहरे चुन लाऊँ
तुझे सजाने ही, फूलों को तोड़ा है।।
दूध कटोरा भर लाई हूँ अब कान्हा
डाला है जिसमें मीठा मिश्री दाना
पी लो, काहे तुमने मुख को मोड़ा है।।
जन्म जन्म से तेरा मेरा नाता है
श्याम सलोने सपनों में तू आता है
मुझे अकेला तूने कभी ना छोड़ा है।।
भक्तिरस में डूबी सुंदर रचना और अनुपम चित्र
जवाब देंहटाएंजय श्री कृष्णा... बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना दी।
जवाब देंहटाएंसस्नेह।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ८ सितंबर २०२३ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
भावपूर्ण रचना .
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंकृष्ण के जीवन को बेहद खूबसूरत तरीके से उकेरा है
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर सृजन
बधाई
सुंदर सृजन
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर ! जय श्री कृष्ण !
जवाब देंहटाएंवाह!!!
जवाब देंहटाएंतूने मुझसे ऐसा नाता जोड़ा है
तेरी खातिर हर नाते को तोड़ा है ।....
मुझे अकेला तूने कभी ना छोड़ा है।।
भक्ति भाव से ओतप्रोत लाजवाब गीत
वाहवाह...
मुरलीधर कृष्ण कन्हैया और आपकी तस्वीर बहुत ही मनमोहक है...हार्दिक शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंकृष्णमय हो गया प्पोरा आनद ... कमाल के भाव ... बहुत ही सुन्दर सृजन मीना जी ... बहुत बहुत बधाई ...
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर भक्तिमय रचना
जवाब देंहटाएंआप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।
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