चिड़िया
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शुक्रवार, 27 जून 2025
पुनः बसंत लिखूँगी !
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पतझड़ के मौसम में झड़ते पात - पात की पीड़ाओं को, झंझा की झकझोरों से झरने वाली कच्ची कलियों को, लिखने वाले खूब लिख गए, मैं पतझड़ का अंत लिखूँगी ...
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गुरुवार, 20 मार्च 2025
हमारी समझ ना आए
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जीवन का यह गणित हमारी समझ ना आए ! जोड़ - घटा का फलित हमारी समझ ना आए ! कभी एक के जुड़ जाने से , खुशियाँ सहस गुना हो जाती ! कभी एक का ही घट ज...
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शनिवार, 15 मार्च 2025
हफ्ते भर का चिट्ठा
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जैसे कागज की कश्ती बहती बहते पानी में वैसे ही दिन बीत रहे हैं बिन तेरे ओ साथी ! कहता है मन अभी मिलेगा उसका कोई संदेशा ना आने से मन बुझ जाता ...
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