चिड़िया
https://chidiyya.blogspot.in
शुक्रवार, 18 नवंबर 2022
रिश्ते
›
जितना बूझूँ, उतना उलझें एक पहेली जैसे रिश्ते। स्नेह दृष्टि की उष्मा पाकर, पिघल - पिघलकर रिसते रिश्ते। कभी लहू - से सुर्ख रंग के, कभी हरे हैं...
12 टिप्पणियां:
रविवार, 13 नवंबर 2022
पनघट
›
यादों के सब पन्ने उड़कर बिखरे जीवन सरिता तट पर, सारी सखियाँ लौट गईं, मैं एकाकी सूने पनघट पर ! इस पनघट पर मेल हुआ था, हँसी - खुशी का खेल हुआ थ...
15 टिप्पणियां:
रविवार, 17 जुलाई 2022
हिंदी भाषा: सुझाव और विमर्श
›
मुझे यह बताते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है कि आदरणीय माडभूषि रंगराज अयंगर जी की सातवीं पुस्तक "हिंदी भाषा : सुझाव और विमर्श" का ...
9 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें