चिड़िया

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शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

रिश्ते

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जितना बूझूँ, उतना उलझें एक पहेली जैसे रिश्ते। स्नेह दृष्टि की उष्मा पाकर, पिघल - पिघलकर रिसते रिश्ते। कभी लहू - से सुर्ख रंग के, कभी हरे हैं...
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रविवार, 13 नवंबर 2022

पनघट

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यादों के सब पन्ने उड़कर बिखरे जीवन सरिता तट पर, सारी सखियाँ लौट गईं, मैं एकाकी सूने पनघट पर ! इस पनघट पर मेल हुआ था, हँसी - खुशी का खेल हुआ थ...
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रविवार, 17 जुलाई 2022

हिंदी भाषा: सुझाव और विमर्श

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  मुझे यह बताते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है कि आदरणीय माडभूषि रंगराज अयंगर जी की सातवीं पुस्तक "हिंदी भाषा : सुझाव और विमर्श" का ...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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