चिड़िया
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बुधवार, 28 अक्टूबर 2020
कितना और मुझे चलना है ?
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जीवन की लंबी राहों में पीछे छूटे सहचर कितने ! कितनी यात्रा बाकी है अब ? कितना और मुझे चलना है ? कितना और अभी बाकी है, इन श्वासों का ऋण आत्म...
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बुधवार, 21 अक्टूबर 2020
शरद पूर्णिमा के मयंक से
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इस जीवन की मरुभूमि पर सजल सरोवर जैसे तुम ! चुभते पाषाणों के पथ पर कोमल दूर्वादल से तुम ! पीड़ा की कज्जल बदरी ने ढाँप दिए खुशियों के तारे, इक ...
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मंगलवार, 29 सितंबर 2020
प्रकृति - गीत
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दूर गगन इक तारा चमके मेरी ओर निहारे, मुझको अपने पास बुलाए चंदा बाँह पसारे । पंछी अपने गीतों की दे जाते हैं सौगातें, वृक्ष-लता सपनों में आ कर...
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