मंगलवार, 29 सितंबर 2020

प्रकृति - गीत

दूर गगन इक तारा चमके

मेरी ओर निहारे,

मुझको अपने पास बुलाए

चंदा बाँह पसारे ।


पंछी अपने गीतों की

दे जाते हैं सौगातें,

वृक्ष-लता सपनों में आ

करते हैं मुझसे बातें ।


झरने दुग्ध धवल बूँदों से

मुझे भिगो देते हैं,

अपने संग माला में मुझको

फूल पिरो लेते हैं ।


कोयलिया कहती है मेरे

स्वर में तुम भी बोलो,

नदिया कहती, शीतल जल में

अपने पाँव भिगो लो ।


सारी पुष्प-कथाएँ

तितली-भौंरे बाँच सुनाते,

नन्हे-से जुगनू तम में

आशा की ज्योति जगाते ।


लहरें सागर की देती हैं

स्नेह निमंत्रण आने का,

पर्वत शिखर सदा कहते हैं

भूलो दर्द जमाने का ।


माँ की तरह प्रकृति मुझ पर

ममता बरसाती है,

अपने हृदय लगाकर मुझको

मीठी नींद सुलाती है।



28 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. आप सभी कुछ रोचक व् मर्मस्पर्शी कविताएँ पढ़ने के लिए मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं।पसन्द आएं तो फॉलो करके उत्साह बढ़ाएं।

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    2. सादर आभार आदरणीय अयंगर सर।

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  2. माँ की तरह प्रकृति मुझ पर

    ममता बरसाती है,

    अपने हृदय लगाकर मुझको

    मीठी नींद सुलाती है।

    वाह!!!
    प्रकृति की प्राकृतिक छटा सी खूबसूरत रचना...
    बहि ही लाजवाब।

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  3. लहरें सागर की देती हैं
    स्नेह निमंत्रण आने का,
    पर्वत शिखर सदा कहते हैं
    भूलो दर्द जमाने का ।

    बहुत खूब मीना जी,सादर नमन आपको

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  4. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 02-10-2020) को "पंथ होने दो अपरिचित" (चर्चा अंक-3842) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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  5. यह प्रकृति ही है,जो माँ के समान, सबका पोषण और रक्षण करती है.

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  6. उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार एवं स्वागत आपका मनोज जी।

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  7. यह प्रकृति गीत भीतर तक भिगो रही है । अति सुंदर ।

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार एवं स्नेह आदरणीया अमृता जी।

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  8. हमेशा की तरह बहुत ही सुंदर मीना दी।
    सादर

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार एवं स्नेह प्रिय अनिता।

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  9. उत्तर
    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपके उत्साह बढ़ाते शब्दों के लिए सुजाता जी।

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  10. सारी पुष्प-कथाएँ

    तितली-भौंरे बाँच सुनाते,

    नन्हे-से जुगनू तम में

    आशा की ज्योति जगाते बहुत बहुत सराहनीय |

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  11. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (20-2-22) को 'तब गुलमोहर खिलता है'(चर्चा अंक-4346)पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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  12. वाह!सराहनीय सृजन कितनी सहजता से आप अपनी बात कह देते हो। हर बंद लाज़वाब 👌
    सादर

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  13. चराचर जगत सहजता से गीत माला में पिरोया. सुन्दर से अति सुदर , साधुवाद आदरणीया

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  14. वाह मीना जी !
    प्रकृति से विमुख हो कर हम सिर्फ़ सांस लेने वाली एक मशीन बन कर रह गए हैं.
    आपने इस मशीन में फिर से आत्मा को प्रविष्ट कराया है.

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