चिड़िया

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मंगलवार, 29 सितंबर 2020

प्रकृति - गीत

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दूर गगन इक तारा चमके मेरी ओर निहारे, मुझको अपने पास बुलाए चंदा बाँह पसारे । पंछी अपने गीतों की दे जाते हैं सौगातें, वृक्ष-लता सपनों में आ कर...
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सोमवार, 28 सितंबर 2020

कब तक चलना है एकाकी ?

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जीवन की दुस्तर राहों पर, कब तक चलना है एकाकी ? ठोकर खाकर गिर जाना है और सँभलना है एकाकी !!! मैंने सबकी राहों से, हरदम बीना है काँटों को । मे...
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शनिवार, 19 सितंबर 2020

उफ्फ ! कितना लिख रहे हैं लोग !

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उफ्फ ! कितना लिख रहे हैं लोग ! लिख-लिख कर दरो दीवारों पर, बंदूकों पर, औजारों पर, तटबंधों पर, मँझधारों पर, जो भी मन में हजम ना हुआ उसकी उल्टी...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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