चिड़िया
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रविवार, 29 सितंबर 2019
कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?
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कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ? जिससे पहुँचे भाव हृदय तक, मैं वह गीत कहाँ से लाऊँ ? इस जग के ताने-बाने में अपना नाता बुना ना जाए ना जाने...
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शनिवार, 27 जुलाई 2019
यथार्थ
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मैंने अपने खून के कुछ कतरे बोए थे, उनको सींचा था मैंने अपनी साँसों से अपने ख्वाबों को कूट-काटकर खाद बनाकर डाली मैंने !!! उन कतरों ...
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गुरुवार, 11 जुलाई 2019
सावन
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बोल पथिक ! क्या तेरे देस, सावन अब भी ऐसा होता है ? परदेसी बादल, वसुधा के नयनों में सपने बोता है ? बाग-बगीचों में अब भी, झूले पड़ते...
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