चिड़िया

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रविवार, 29 सितंबर 2019

कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?

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कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ? जिससे पहुँचे भाव हृदय तक, मैं वह गीत कहाँ से लाऊँ ? इस जग के ताने-बाने में अपना नाता बुना ना जाए ना जाने...
21 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 27 जुलाई 2019

यथार्थ

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मैंने अपने खून के कुछ  कतरे बोए थे, उनको सींचा था मैंने  अपनी साँसों से अपने ख्वाबों को कूट-काटकर खाद बनाकर डाली मैंने !!! उन कतरों ...
24 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 11 जुलाई 2019

सावन

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बोल पथिक ! क्या तेरे देस, सावन अब भी ऐसा होता है ? परदेसी बादल, वसुधा के  नयनों में सपने बोता है ? बाग-बगीचों में अब भी, झूले पड़ते...
29 टिप्‍पणियां:
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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