चिड़िया

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शनिवार, 29 जून 2019

तुम समय संग आगे निकलते गए....

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तुम समय संग आगे निकलते गए, मैं जहाँ थी वहीं पर खड़ी रह गई.... इतने ऊँचे हुए, आसमां हो गए, मैं धरा थी, धरा हूँ, धरा ही रही !!! रिक्त ह...
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रविवार, 16 जून 2019

एक हृदय पाने की कोशिश !

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एक हृदय पाने की कोशिश ! इस कोशिश में शब्द छिन गए चेहरे की मुस्कान छिन गई अंतर के सब बोल छिन गए यादों के सामान छिन गए ! पर हँसने...
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शनिवार, 1 जून 2019

नए ब्लॉग का श्रीगणेश

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आज से अपनी सभी कविताओं को अपने पुराने ब्लॉग 'चिड़िया' से नए ब्लॉग 'प्रतिध्वनि' पर डाल रही हूँ। पिछले कई महीनों से मैं अपने ...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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