चिड़िया
https://chidiyya.blogspot.in
शनिवार, 29 जून 2019
तुम समय संग आगे निकलते गए....
›
तुम समय संग आगे निकलते गए, मैं जहाँ थी वहीं पर खड़ी रह गई.... इतने ऊँचे हुए, आसमां हो गए, मैं धरा थी, धरा हूँ, धरा ही रही !!! रिक्त ह...
2 टिप्पणियां:
रविवार, 16 जून 2019
एक हृदय पाने की कोशिश !
›
एक हृदय पाने की कोशिश ! इस कोशिश में शब्द छिन गए चेहरे की मुस्कान छिन गई अंतर के सब बोल छिन गए यादों के सामान छिन गए ! पर हँसने...
12 टिप्पणियां:
शनिवार, 1 जून 2019
नए ब्लॉग का श्रीगणेश
›
आज से अपनी सभी कविताओं को अपने पुराने ब्लॉग 'चिड़िया' से नए ब्लॉग 'प्रतिध्वनि' पर डाल रही हूँ। पिछले कई महीनों से मैं अपने ...
12 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें