चिड़िया
https://chidiyya.blogspot.in
मंगलवार, 30 अप्रैल 2019
मेरे दोस्त !
›
ज़िंदा हूँ साँसें अब भी चल रही हैं मेरे दोस्त ! थकी-थकी सी शाम, ढल रही है मेरे दोस्त ! बुलबुल ने साथ छोड़ दिया सूखे गुलों का कि रुत बहा...
18 टिप्पणियां:
बुधवार, 24 अप्रैल 2019
वेदना से प्रेम तक
›
एक पल का, हाँ, सिर्फ एक पल का समय लगता है, भावना का रुपांतरण वेदना में होने के लिए ! और वही पल साक्षी होता है मनुष्य में ईश्वर ...
16 टिप्पणियां:
गुरुवार, 18 अप्रैल 2019
गीत उगाए हैं !!!
›
मन की बंजर भूमि पर, कुछ बाग लगाए हैं ! मैंने दर्द को बोकर, अपने गीत उगाए हैं !!! रिश्ते-नातों का विष पीकर, नीलकंठ से शब्द हुए ! स्वा...
16 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें