चिड़िया

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मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

मेरे दोस्त !

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ज़िंदा हूँ साँसें अब भी चल रही हैं मेरे दोस्त ! थकी-थकी सी शाम, ढल रही है मेरे दोस्त ! बुलबुल ने साथ छोड़ दिया सूखे गुलों का कि रुत बहा...
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बुधवार, 24 अप्रैल 2019

वेदना से प्रेम तक

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एक पल का, हाँ, सिर्फ एक पल का समय लगता है, भावना का रुपांतरण वेदना में होने के लिए ! और वही पल साक्षी होता है मनुष्य में ईश्वर ...
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गुरुवार, 18 अप्रैल 2019

गीत उगाए हैं !!!

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मन की बंजर भूमि पर, कुछ बाग लगाए हैं ! मैंने दर्द को बोकर, अपने गीत उगाए हैं !!! रिश्ते-नातों का विष पीकर, नीलकंठ से शब्द हुए ! स्वा...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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