चिड़िया

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गुरुवार, 18 अप्रैल 2019

गीत उगाए हैं !!!

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मन की बंजर भूमि पर, कुछ बाग लगाए हैं ! मैंने दर्द को बोकर, अपने गीत उगाए हैं !!! रिश्ते-नातों का विष पीकर, नीलकंठ से शब्द हुए ! स्वा...
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मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017

एक दीप !

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एक दीप, मन के मंदिर में, कटुता द्वेष मिटाने को ! एक दीप, घर के मंदिर में भक्ति सुधारस पाने को ! एक दीप, तुलसी चौरे पर  वृंदा सी शुचि...
7 टिप्‍पणियां:
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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