व्यवहार बदल देते हैं औकात देखकर
मुंह फेर लेते, लोग हैं हालात देखकर !
मुंह फेर लेते, लोग हैं हालात देखकर !
रिश्तों की इस बाजार में , लगती हैं बोलियाँ
करते हैं लेन - देन, मोल - भाव देखकर !
मानक है यहाँ प्रेम का, बस देह का मिलन
तुम क्या करोगे , नयनों की बरसात देखकर !
वो भी चला गया है थाम हाथ किसी का
हँसते हैं लोग अब मेरे जज़बात देखकर !
मेरी तबीयत को जरा, नासाज देखकर !
बिगड़े जो कभी बात तो आवाज लगाना
हम वो नहीं जो साथ दें खुशहाल देखकर !
बिगड़े जो कभी बात तो आवाज लगाना
जवाब देंहटाएंहम वो नहीं जो साथ दें खुशहाल देखकर !
वाह !!
अद्भुत सृजन ।
बहुत बहुत शुक्रिया मीना जी
हटाएंवाह-वाह दी लाज़वाब गज़ल ,एक से बढ़कर एक शेर। दुनिया की यही सच्चाई है। गज़ब लिखा आपने दी।
जवाब देंहटाएंसस्नेह।
सादर।
-----
नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ६ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
बहुत बहुत शुक्रिया प्रिय श्वेता
हटाएंनव वर्ष मंगलमय हो | सुंदर |
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर।
जवाब देंहटाएंवाह ! मीना जी, अभिनंदन।
जवाब देंहटाएंआदरणीय नुपूर जी, आदरणीय द्विवेदी जी, आदरणीय जोशी सर, आपका सभी का बहुत बहुत आभार !
जवाब देंहटाएंबिगड़े कभी जो बात ... क्या बात है ! शानदार गज़ल
जवाब देंहटाएं