चिड़िया
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रविवार, 23 फ़रवरी 2025
अपने हृदय में अब मुझे विश्राम दो
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थक गए कदम, थका - थका है मन, अपने हृदय में अब मुझे विश्राम दो । अनवरत अथक प्रवास को मेरे, प्रिय ! किसी प्रयत्न से विराम दो । परिक्रमा कब तक क...
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शुक्रवार, 24 जनवरी 2025
हम सब कितने बँटे हुए हैं
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हम सब कितने बँटे हुए हैं इक दूजे से कटे हुए हैं ! कब, क्या कहना, किसे, कहाँ पर सब पहले से रटे हुए हैं ! दिखने को बाहर से दिखते जैसे बिलकुल ज...
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गुरुवार, 23 जनवरी 2025
साथ
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पतझड़ आते ही बिछड़ना होता है पत्तों को अपनी शाख से बस, कौन सा कब छूटेगा यही तय नहीं होता ! जाना सबको है । साथी, जो खून के रिश्तों से बनते ...
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