चिड़िया

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शनिवार, 29 जनवरी 2022

भावनाएँ मेरी अब प्रवासी हुईं

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इस धरा पर तो मधुमास फिर छा गया, किंतु पतझड़ मेरे मन की वासी हुई । शब्द परदेस में जाके सब बस गए, भावनाएँ मेरी अब प्रवासी हुईं ।।  जिसके प्रतिन...
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शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2021

तलाश

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दिन पर दिन बढ़ती जा रही है दिनभर की भाग दौड़, कुछ उम्र, कुछ जिम्मेदारियों  और कुछ सेहत के तकाजों का जवाब देते-देते, पस्त हो जाता है शरीर और मन...
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सोमवार, 16 अगस्त 2021

कितनी यादें दे जाते हैं !

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लोग पुराने जब जाते हैं, कितनी यादें दे जाते हैं ! कसमें भी कुछ काम ना आतीं, वादे भी सब रह जाते हैं ! पीपल के पत्तों के भी पीले होने की रुत ह...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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