चिड़िया
https://chidiyya.blogspot.in
सोमवार, 16 अगस्त 2021
कितनी यादें दे जाते हैं !
›
लोग पुराने जब जाते हैं, कितनी यादें दे जाते हैं ! कसमें भी कुछ काम ना आतीं, वादे भी सब रह जाते हैं ! पीपल के पत्तों के भी पीले होने की रुत ह...
27 टिप्पणियां:
रविवार, 11 जुलाई 2021
मन तू, हो जा रे, अंतर्मुखी !
›
मन तू, हो जा रे, अंतर्मुखी ! भागेगा बाहर तो होगा दुःखी ! मन तू, हो जा रे, अंतर्मुखी ! ये माया के मेले, झंझट झमेले यूँ ही चलेंगे रे ! चलते र...
43 टिप्पणियां:
सोमवार, 5 जुलाई 2021
ये चाँद बरफ के टुकड़े - सा
›
बेबस अहसासों की रुत है, मौसम है भीगी आँखों का । बहके - बहके जज्बातों में मन जाने कैसे सँभलता है। अँखियों की सरहद से बाहर क्या मोल है कोई सपन...
30 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें