चिड़िया

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सोमवार, 16 अगस्त 2021

कितनी यादें दे जाते हैं !

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लोग पुराने जब जाते हैं, कितनी यादें दे जाते हैं ! कसमें भी कुछ काम ना आतीं, वादे भी सब रह जाते हैं ! पीपल के पत्तों के भी पीले होने की रुत ह...
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रविवार, 11 जुलाई 2021

मन तू, हो जा रे, अंतर्मुखी !

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 मन तू, हो जा रे, अंतर्मुखी ! भागेगा बाहर तो होगा दुःखी ! मन तू, हो जा रे, अंतर्मुखी ! ये माया के मेले, झंझट झमेले यूँ ही चलेंगे रे ! चलते र...
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सोमवार, 5 जुलाई 2021

ये चाँद बरफ के टुकड़े - सा

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बेबस अहसासों की रुत है, मौसम है भीगी आँखों का । बहके - बहके जज्बातों में मन जाने कैसे सँभलता है। अँखियों की सरहद से बाहर क्या मोल है कोई सपन...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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