चिड़िया
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शनिवार, 13 मार्च 2021
मुस्कुराए भर थे हम तो...
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मुस्कुराए भर थे हम तो देखकर उनकी तरफ, बात थी छोटी सी, मगर बन गई कहानियाँ ! मुस्कुराए भर थे हम तो.... उम्र तो बस उम्र थी, बीतती चली गई...
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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021
फिर तुम्हारी राहों में !
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तड़पेगी याद मेरी, फिर अधूरी चाहों में ! भटकेंगे प्राण मेरे, फिर तुम्हारी राहों में !! छूकर वह पारिजात, कलियाँ कुछ सद्यजात। बंद कर पलकें, करोग...
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गुरुवार, 26 नवंबर 2020
स्वर्ण-से क्षण
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स्वर्ण संध्या, स्वर्ण दिनकर सब दिशाएँ सुनहरी ! बिछ गई सारी धरा पर एक चादर सुनहरी ! आसमाँ पर बादलों में इक सुनहरा गाँव है, स्वर्ण-से क्षण, स्...
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