चिड़िया

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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं !

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फिर कुछ बातें याद आती हैं फिर कुछ लम्हे तड़पाते हैं ! कोई खुदा-सा हो जाता है और हम सजदा कर जाते हैं। रिश्तों के गहरे दरिया में बहते है...
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बुधवार, 4 दिसंबर 2019

अपने-अपने दर्द

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अपने-अपने दर्द सभी को खुद ही सहने पड़ते हैं दर्द छुपाने, मनगढ़ंत कुछ किस्से कहने पड़ते हैं। किसको फुर्सत, कौन यहाँ तेरे गम का साझी होगा ? प...
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सोमवार, 4 नवंबर 2019

चिड़िया बनकर उड़ जाते हैं....

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कुछ इकतरफा रिश्ते बनते हैं किसी नदी के एक किनारे, चलते-चलते एक दिशा में ही, सूरज के उगते-उगते एक तरफ ही रोज, चाँद के ढलते-ढलते ये इकतरफ...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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