चिड़िया
https://chidiyya.blogspot.in
शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019
टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं !
›
फिर कुछ बातें याद आती हैं फिर कुछ लम्हे तड़पाते हैं ! कोई खुदा-सा हो जाता है और हम सजदा कर जाते हैं। रिश्तों के गहरे दरिया में बहते है...
12 टिप्पणियां:
बुधवार, 4 दिसंबर 2019
अपने-अपने दर्द
›
अपने-अपने दर्द सभी को खुद ही सहने पड़ते हैं दर्द छुपाने, मनगढ़ंत कुछ किस्से कहने पड़ते हैं। किसको फुर्सत, कौन यहाँ तेरे गम का साझी होगा ? प...
14 टिप्पणियां:
सोमवार, 4 नवंबर 2019
चिड़िया बनकर उड़ जाते हैं....
›
कुछ इकतरफा रिश्ते बनते हैं किसी नदी के एक किनारे, चलते-चलते एक दिशा में ही, सूरज के उगते-उगते एक तरफ ही रोज, चाँद के ढलते-ढलते ये इकतरफ...
18 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें