चिड़िया

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रविवार, 17 फ़रवरी 2019

विराम

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कुछ अपरिहार्य कारणों से एक छोटे अंतराल के लिए लेखन से विदा ले रही हूँ। पिछला वर्ष मेरे लिए बहुत ज्यादा उतार चढाव का रहा। पापा को खोया। कार...
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रविवार, 27 जनवरी 2019

टुकड़ा मैं तेरे दिल का....

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पापा की उम्र हो गई थी, वे तकलीफ झेल रहे थे, शारीरिक कष्टों से उन्हें मुक्ति मिल गई, वे निर्वाण के मार्ग पर चले गए, ईश्वर उनकी आत्मा को शां...
4 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 21 जनवरी 2019

पापा बहुत कुछ करते हैं

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31 दिसंबर 2017 (पापा के जन्मदिन पर ली गई तस्वीर...) मम्मी कहती उन्हें आलसी नहीं 'वाक' पर जाते ना जाने थोड़ा चलने से क्यों प...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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