चिड़िया

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शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

अपराजिता ही रहूँगी !

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भागीरथी की धार सी कल्पांत तक मैं बहूँगी अपराजिता ही थी सदा अपराजिता ही रहूँगी। वंचना विषपान करना ही मेरी नियति में है, पर मेरा विश...
रविवार, 22 जुलाई 2018

इतनी इनायत और करो....

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बस इतनी इनायत और करो इक बार ज़ुबां से कह भी दो, जो लेन-देन का नाता था अब उसका मोल बता भी दो ! इतनी इनायत और करो..... इस जीवन के मान...
रविवार, 15 जुलाई 2018

मीरा बावरी !

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सुन कान्हा की मधुर मुरलिया, खो गई मीरा बावरी ! उस छलिया के प्रेम में पड़कर, हो गई मीरा बावरी ! नटवर नागर के दर्शन की लगन लगी जब नैनो...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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