चिड़िया

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शनिवार, 26 मई 2018

सावन बोला जेठ से.....

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सावन बोला जेठ से तुम क्यों तपते हो इतना ? दया नहीं आती तुमको, धरती का देख झुलसना ? त्राहि त्राहि करते हैं प्राणी वृक्षों को झुलसाए हो...
2 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 24 मई 2018

जरूरत क्या दलीलों की !

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हँसेंगे लोग तुम पर, बात ना करना उसूलों की मोहब्बत की, वफा की, प्यार की बातें फ़ुज़ूलों की। लगाएँगे ठहाके, पीटकर ताली हँसेगे सब चलो ब...
सोमवार, 21 मई 2018

आस

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आस तो थी तुमसे, पर कोई खास नहीं थी । इतनी सी थी कि जब सारी दुनिया खड़ी हो मेरे विरोध में, तब तुम को अपने साथ खड़ा पाऊँ । मेरी खुद्दारी...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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