चिड़िया

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शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

अस्तित्व

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जैसे मंदिर और दीप जैसे मोती और सीप, जैसे चंद्र और चकोर जैसे मेघ और मोर, जैसे चातक और सावन जैसे हृदय और धड़कन, जैसे सुगंध और सुम...
बुधवार, 25 अप्रैल 2018

तब मन तो, दुखता है ना ?

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काँटों से हरपल चुभन मिली, मिलनी ही थी ! पर फूल चुभें जब काँटे बन, आँचल को तार-तार कर दें ! जब कलियों से भी जख्म मिलें, पंखुड़ियों से त...
रविवार, 15 अप्रैल 2018

कैसे रोक पाओगे ?

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जब कोई तितली, हौले से आकर, तुम्हारे लगाए फूलों को अपने मखमली पंखों से सहलाकर, कहे - 'प्यार'..... तो उसे तुरंत उड़ा देना !!! ...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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