चिड़िया
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शनिवार, 23 दिसंबर 2017
लम्हे
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खनकती चूड़ियों वाली सुबहें छ्नकती झाँझरों वाली रातें, नर्म नाजुक से महकते लम्हे, बंद हैं वक्त के पिटारे में ! प्यार की धड़कनों को सुनत...
मंगलवार, 19 दिसंबर 2017
दो बालगीत
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1- जानवरों का नववर्ष जंगल के पशुओं ने सोचा हम भी धूम मचाएँ , मानव के जैसे ही कुछ हम भी नववर्ष मनाएँ ! वानर टोली के जिम्मे है फल-फू...
शनिवार, 16 दिसंबर 2017
सुन रहे हो ना....
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गर्जते बादलों से बारिश नहीं होती, खामोश मेघों का भरा मन फूट पड़ता है ! तुम सुन रहे हो ना, मुझे कुछ बताना है तुम्हे.... वह फुलचुही चिड़...
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