चिड़िया

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शनिवार, 23 सितंबर 2017

बस, यूँ ही....

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नौकरी, घर, रिश्तों का ट्रैफिक लगा,  ज़िंदगी की ट्रेन छूटी, बस यूँ ही !!! है दिवाली पास, जैसे ही सुना, चरमराई खाट टूटी, बस यूँ ही !!! ड...
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रविवार, 17 सितंबर 2017

स्पंदन - विहीन !

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ओ रंगीले भ्रमर ! कैसे स्वागत करती तुम्हारा ? लाख कोशिशों से भी मुझे, कुमुदिनी बनना न आ सका ! कंटकों के बीच जन्मी कुसुम कलिका तो थी म...
7 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

अबूझे प्रश्न

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मैंने नजर उठाकर देखा, जब भी अपने चारों ओर... स्वार्थ, ईर्ष्या औ' लालच का, पाया कहीं ओर ना छोर । सहते रहते क्यों हर पीड़ा  मूक, ...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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