चिड़िया

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गुरुवार, 7 सितंबर 2017

चलो, खिल्ली उड़ाएँ

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चलो हम खिल्ली उड़ाएँ, लोग जो अच्छे हैं,सच्चे हैं, सरल हैं, सीधे हैं, देश की जो सोचते हैं, भाईचारा पोसते हैं, उन्हें धमकाएँ, डराएँ !!! ...
सोमवार, 4 सितंबर 2017

अध्यापक, शिक्षक या टीचर ?

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ओ एकांत कुटी-चर ! तू टीचर बनकर कहाँ आ गया ! वन के पशु भी सजग रहे, पर तू ही धोखा यहाँ खा गया ! तू वशिष्ठ था जिन्हें, राम भी, कर प्रणाम...
1 टिप्पणी:
शनिवार, 2 सितंबर 2017

शब्द

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मानव की अनमोल धरोहर ईश्वर का अनुपम उपहार, जीवन के खामोश साज पर सुर संगीत सजाते शब्द !!! अनजाने भावों से मिलकर त्वरित मित्रता कर लेते,...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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