चिड़िया
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सोमवार, 31 जुलाई 2017
बाबुल मेरे !
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सावन के बहाने, बुला भेजो बाबुल, बचपन को कर लूँगी याद रे ! बाबुल मेरे ! तेरे कलेजे से लग के ।। नन्हें से पाँवों में, चाँदी की पायल, प...
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शनिवार, 29 जुलाई 2017
बात सितारों की करती हूँ !
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चलती तो धरती पर हूँ पर बात सितारों की करती हूँ ! पतझड़ है तो क्या ग़म है, उम्मीद बहारों की करती हूँ ।। पिघल-पिघलकर ज्यों हिमराशि, जलध...
रविवार, 23 जुलाई 2017
हर दौर गुजरता रहा
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जिंदगी चलती रही, हर दौर गुजरता रहा, इम्तहां पर इम्तहां ले, वक्त सरकता रहा । इस बार अलग था कुछ, अंदाजे-बयां उनका, लफ्जों में छुपा खंजर,...
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