चिड़िया

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शुक्रवार, 26 मई 2017

नुमाइश करिए

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दोस्ती-प्यार-वफा की, न अब ख्वाहिश करिए ये नुमाइश का जमाना है नुमाइश करिए । अब कहाँ वक्त किसी को जनाब पढ़ने का, इरादा हो भी, खत लिखने का,...
रविवार, 21 मई 2017

माटी

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      *माटी* जब यह तन माटी हो जाए, काम किसी के आए तो ! माटी में इक पौधा जन्मे, कलियाँ चंद, खिलाए तो ! सूरज तपे, बनें फिर बादल, फ...
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शुक्रवार, 12 मई 2017

तब गुलमोहर खिलता है !

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 तब गुलमोहर खिलता है ! -------------–------------------------- फूले पलाश झर जाते हैं, टेसू आँसू  बरसाते हैं, दारुण दिनकर की ज्व...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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