चिड़िया
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रविवार, 26 मार्च 2017
प्रेम बड़ा छ्लता है
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प्रेम बड़ा छ्लता है, साथी, प्रेम बड़ा छलता है । जलती तो बाती है, साथी, दीप कहाँ जलता है ? प्रेम बड़ा छलता है । कहीं किसी से जीवनभर में ...
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बुधवार, 15 मार्च 2017
दोषी हो तुम !
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दोषी हो तुम ! ********* स्वार्थ के इस दौर में जब, अविश्वास और संदेह के भाव, घुट्टी में पिलाए जा रहे हैं.... तुम संप्रेषित कर रहे हो, ...
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सोमवार, 13 मार्च 2017
होली
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होली के अवसर पर सारे, रंगों को मैं ले आऊँ, और तुम्हारे जीवन में मैं, उन रंगों को बिखराऊँ... लाल रंग है गुलमोहर का, केशरिया पलाश का ह...
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