चिड़िया

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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

वटवृक्ष और जूहीलता

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गाँव की कच्ची पगडंडी के किनारे बहुत से वृक्ष थे. नीम, पीपल, कनेर, बहुत सारे. पर उनमें खास था एक बरगद का पेड़ - बहुत बड़ा, विशाल और बह...
मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

"खुशनुमा सुबह"

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सुबह जगाने आया, मस्त हवा का झोंका। आँख खुली, मैंने खिड़की से बाहर देखा।। गर्दन उचका, सूर्य पूर्व से, झांक रहा था। आने के पहले क्या स...
गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

मत समर्पण कर !

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मत समर्पण कर मत समर्पण कर, अब किसी के सामने खुद को न अर्पण कर ! मत समर्पण कर । देवता के चरण में तू फूल बनकर बिछ गई, पर क्या मिला...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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